वांगिरी फ्रॉड क्या है, ये टेलीकॉम ऑपरेटर को कैसे प्रभावित कर रहा है?
वांगिरी फ्रॉड एक तरह का साइबर क्राइम है लेकिन ये दूसरे साइबर क्राइम के मुकाबले थोड़ा खतरनाक है। जिसमें साइबर अपराधी अलग-अलग मोबाइल नंबरों पर काफी कम समय के लिए कॉल करते हैं और कॉल का जवाब देने से पहले वापस कॉल कट कर देते हैं। इस तरह, कॉल का डिटेल कॉल रिसीवर के फोन पर दिखाई देता है और कई बार लोग पर्सनल या जरूरी कॉल समझकर उसी नंबर पर वापस कॉल कर देते हैं।
अक्सर ये नंबर किसी प्रीमियम रेट के होते हैं या फिर इंटरनेशनल नंबर होता है और बात करने के लिए प्रति मिनट की उच्च दरों का भुगतान करना पड़ता है। इस तरह के फ्रॉड से साइबर अपराधी बड़ी मात्रा में पैसे कमाते हैं।

वांगिरी फ्रॉड टेलीकॉम ऑपरेटरों पर कैसे प्रभाव डालता है?
1. रेवेन्यू का नुकसान: जब ग्राहक फ्रॉड वाले नंबर पर दोबारा कॉल करते हैं तो प्रीमियम दरों के कारण ज्यादा बिलिंग होती है। ग्राहक इसका भुगतान करने से इनकार कर सकते हैं, जिससे ऑपरेटर को रेवेन्यू में नुकसान उठाना पड़ता है।
2. नेटवर्क पर अतिरिक्त भार: कई वांगिरी कॉल से टेलिकॉम नेटवर्क पर अतिरिक्त भार पड़ता है, जिससे नेटवर्क की क्षमता प्रभावित होती है।
3. ग्राहको को परेशानी: इस तरह की धोखाधड़ी से ग्राहकों को नेटवर्क से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
4. रेगुलेटरी पैनालिटी: वांगिरी फ्रॉड को रोकने में विफल रहने पर टेलिकॉम ऑपरेटरों पर नियामकों द्वारा पैनालिटी लगाई जा सकती है।
टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनियां इस समस्या से निपटने के लिए फ़िल्टरिंग टेक्नालॉजी और हाई सिक्योरिटी तरीको का उपयोग कर रही हैं साथ ही, उपभोक्ताओं को भी अननोन नंबरों पर वापस कॉल न करने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
वांगिरी हमलों को रोकना मुश्किल क्यों है?
1. इंटरनेशनल ऑपरेशन: ये हमले विदेशों से संचालित किए जाते हैं, जिससे उन्हें पकड़ना या फिर इन्हें कंट्रोल करना बेहद कठिन हो जाता है।
2. टेम्पेरेरी नंबर का उपयोग: फ्रॉड करने वाले बार-बार टेम्पेरेरी मोबाइल नंबरों का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल होता है।
3. कॉल मास्किंग तकनीक: साइबर अपराधी कॉल मास्किंग टेक्नालॉजी का इस्तेमाल करते हैं जिससे मेन कॉल कहां से की जा रही है उसका सोर्स पता करना एक टेढ़ी खीर है।
4. छोटी अवधि के कॉल: ज्यादातर की जाने वाली कॉल बहुत छोटी अवधि के लिए की जाती है जिससे इसकी पहचान करना काफी मुश्किल हो जाता है।
5. डेटा कलेक्शन में कमी: कई टेलिकॉम ऑपरेटर कंपनियों के पास अंतरराष्ट्रीय रूप से कॉल डेटा कलेक्ट करने की क्षमता नहीं होती जिसकी वजह से वे इन पर लगाम नहीं लगा पाती।
इन वजहों से वांगिरी हमलों पर कंट्रोल कर पाना कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।


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