आपके एक इशारे पर चलेगी ये व्हीलचेयर!
आपने शरीर को दिमाग से नियंत्रित होते तो सुना होगा, लेकिन क्या आपने ऐसी व्हीलचेयर के बारे में सुना है, जिसे दिमाग से नियंत्रित किया जा सकता है। ज्यादातर लोगों का जवाब होगा नहीं। लेकिन इस नहीं को हाँ में बदल दिया है अमेरिका के वैज्ञानिकों ने। जिन्होंने एक ऐसा डिवाइस बनाया है, जिसकी मदद से रोबोटिक व्हीलचेयर को दिमाग से नियंत्रित किया जा सकता है। इस डिवाइस की मदद से व्हीलचेयर को मनचाही जगह पर ले जाया जा सकता है। हालांकि, इसका प्रयोग अभी एक बंदर पर किया गया है, जो सफल साबित हुआ। तो है न ये कमाल की बात। तो आइये जानते हैं इस व्हील चेयर के बारे में विस्तार से:
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1. ख़ास लोगों के लिए किया गया विकसित: इस व्हीलचेयर को ऐसे लोगों की मदद के लिए विकसित किया गया है, जो मांसपेशियों पर नियंत्रण और चलने-फिरने की क्षमता खो चुके हैं। इस व्हीलचेयर को चलाने के लिए सिर्फ दिमाग को चलाना होगा और ये वांछित दिशा में चलने लगेगी। इसे विकसित करने वाली टीम में एक भारतीय वैज्ञानिक भी शामिल है।
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2. बंदर पर किया गया प्रयोग: इस व्हीलचेयर का पहला प्रयोग एक बंदर पर किया गया। प्रयोग के दौरान बंदर के सामने अंगूर से भरी प्लेट रखी गई और उसे व्हीलचेयर पर बैठा दिया गया। व्हील चेयर पर बैठे बंदर ने उस प्लेट तक पहुँचने के बारे में सोचा और कम्पुटर डिवाइस ने इस विचार को आदेश में तब्दील कर व्हीलचेयर को कमांड दे दी। फिर क्या व्हील चेयर प्लेट तक पहुँच गई और बंदर ने अंगूर की प्लेट खाली कर दी।

3. बंदर को दिया गया प्रशिक्षण: प्रयोग करने से पहले बंदर को इसके लिए ट्रेंड किया गया। बंदर के मष्तिष्क की तमाम गतिविधियों को रिकॉर्ड किया गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने दिमाग से निकलने वाली तरंगों को व्हीलचेयर को नियंत्रित करने वाली डिजिटल मोटर कमांड में अनुवादित करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम में लगाया। प्रशिक्षण के बाद बंदर सोचने मात्र से ही व्हीलचेयर को नियंत्रित करने में सक्षम हो गया।
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4. इस तरह काम करती है: वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया ईईजी डिवाइस बालों के बराबर का है। प्रयोग के दौरान इसे बंदर दिमाग के प्रिमोटर व सेमाटोसेंसरी हिस्सों में कई माइक्रोफिलामेंट लगाए गये। इससे दिमाग से निकलने वाली तरंगों की मॉनिटरिंग की गई। रिसर्च टीम के सदस्य शंकरनारायणी राजंगम ने बताया कि इससे बंदर के दिमाग से निकलने वाली तरंगों को रिकॉर्ड किया गया।

5. यूँ आया ख्याल: रिसर्च टीम के सदस्यों को इसका विचार ऐसे लोगों की मदद करने की उद्देश्य से आया जो विकलांगता के शिकार हो जाते हैं। अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर न्यूरोइंजीनियरिंग के सह निदेशक मिगुएल निकोलेलिस ने कहा कि अंगों के पक्षाघात या मस्तिष्क के न्यूरांस के मृत हो जाने (एमिट्रोफिक लेटरल स्क्लेरोसिस) से विकलांग हुए लोग दूसरों पर आश्रित हो जाते हैं। उनके लिए चलना फिरना या व्हील चेयर को ऑपरेट करना भी मुश्किल हो जाता है। वे बस अपना दिमाग चला सकते हैं। ऐसे लोगों के लिए यह नई खोज बहुत लाभदायक साबित होगी।


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