Home
News

क्यों कैशबैक से कूपन पर शिफ्ट हुए UPI ऐप्स; सिर्फ एक ‘रिवॉर्ड सिस्टम या ब्रांड्स की कोई स्ट्रेटजी

UPI (Unified Payments Interface) के शुरुआती दिनों में भारत में डिजिटल पेमेंट इवोल्यूशन एक अलग ही उत्साह के साथ शुरू हुई थी। उस समय गूगल पे, फोनपे और पेटीएम जैसे ऐप्स अपने यूजर्स को भारी-भरकम कैशबैक देकर जोड़ने में जुटे थे। 1 से लेकर ₹1,000 तक की ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले ये कैशबैक लोगों के लिए डिजिटल भुगतान की सबसे बड़ी प्रेरणा बन गए थे। लेकिन अब वही ऐप्स सिर्फ 'कूपन' दे रहे हैं, जो अक्सर किसी काम के नहीं होते।

सवाल यह है कि कैशबैक से कूपन तक का ये सफर यूजर्स की सुविधा के लिए है या कंपनियों की जेब भरने के लिए? यहां हम इसके बारे में जानेंगे।

क्यों कैशबैक से कूपन पर शिफ्ट हुए UPI ऐप्स

जब कूपन बना कमाई का जरिया

इस बदलाव के पीछे की सच्चाई जितनी सरल दिखती है, उतनी है नहीं। दरअसल, UPI ऐप्स ने कूपन को सिर्फ एक 'रिवॉर्ड सिस्टम' नहीं, बल्कि मार्केटिंग प्रोडक्ट बना दिया है।

पहले जहां कैशबैक सीधा यूजर के खाते में पहुंचता था, अब कूपन के रूप में सीमित शर्तों के साथ उन्हें छूट का वादा किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, ₹200 की खरीदारी पर ₹30 का डिस्काउंट मिल जाएगा। ये ऑफर किसी अनजान ईकॉमर्स साइट पर उपलब्ध होता है।

ये कूपन असल में किसी ब्रांड की पेड प्रमोशनल स्ट्रैटेजी होती हैं, जिन्हें UPI ऐप्स अपने यूजर्स को बांटते हैं। इसके बदले ब्रांड्स, ऐप्स को पेमेंट करते हैं। यानी जो कैशबैक कभी कंपनियों के खर्च में आता था, अब वही 'कूपन' कंपनियों की कमाई का जरिया बन चुका है।

यूजर्स की आदत को भुनाया गया

UPI कंपनियों को पता था कि एक बार यूज़र्स डिजिटल पेमेंट की आदत डाल लेंगे, तो वे ऑफर कम होने पर भी ऐप्स छोड़कर नहीं जाएंगे। यही हुआ। आज गूगल पे या फोनपे जैसे ऐप्स पर मिलने वाले कूपन शायद ही किसी यूज़र के काम आते हों, लेकिन फिर भी लोग इन ऐप्स का इस्तेमाल जारी रखते हैं।

यह एक यूजर बिहेवियर मॉडिफिकेशन का बेहतरीन उदाहरण है, जहां पहले मुफ्त कैशबैक देकर लोगों को आकर्षित किया गया, फिर जब यूज़र बेस तैयार हो गया, तो रिवॉर्ड सिस्टम को धीरे-धीरे कमाई के मॉडल में बदल दिया गया।

BHIM ऐप: आखिरी उम्मीद?

दिलचस्प बात यह है कि भारत सरकार द्वारा बनाए गए BHIM ऐप पर अब भी कुछ सीमित ट्रांज़ैक्शन पर कैशबैक मिलता है। NPCI लगातार कंपनियों को यह सलाह देता रहा है कि वो मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए यूज़र्स को रिवॉर्ड दें, लेकिन निजी कंपनियां अब सीधे फायदा न देकर, अपने फायदे की सोच रही हैं।

PayPal का नया कदम और भविष्य की झलक

इस बीच, PayPal ने भारत के NPCI के साथ साझेदारी कर UPI को इंटरनेशनल पेमेंट सिस्टम में जोड़ने की तैयारी कर ली है। इससे भारत के यूज़र्स PayPal के ज़रिए विदेशों में UPI से पेमेंट कर पाएंगे। यह एक क्रांतिकारी बदलाव हो सकता है, लेकिन बड़ा सवाल यह भी है कि क्या इस इंटरनेशनल UPI के साथ भी कूपन मॉडल ही अपनाया जाएगा?

UPI की सफलता सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं, भरोसे पर टिकी थी और शुरुआती कैशबैक ने यही भरोसा बनाया। लेकिन अब वही कंपनियां अपने रिवॉर्ड सिस्टम को 'प्रॉफिट जनरेटर' में बदल रही हैं। कहने को यूजर्स को अब भी रिवॉर्ड मिलता है, लेकिन हकीकत में यह रिवॉर्ड ब्रांड्स और ऐप्स की कमाई बन चुका है।

 
Best Mobiles in India

English summary
Why UPI Apps Are Moving from Cashback to Coupons: Smart Reward Strategy or Brand Playbook?
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+
X