क्या खजुराहो में भी पोर्न है ?
इंटरनेट पर हमेशा पोर्न वेबसाइट्स खंगालने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर है। जब तक सुप्रीम कोर्ट या दूरसंचार मंत्रालय दखल नहीं देता तब तक पोर्न सामग्री परोसने वाली वेबसाइटों पर रोक लगाना मुश्किल है। सुप्रीम कोर्ट ने दो महीने पहले पोर्न वेबसाइट्स पर बच्चों पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए थे। अदालत के निर्देश के बाद इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों ने यह कहते हुए अपने हाथ खडे कर दिए कि जब तक कोर्ट या मंत्रालय की तरफ से निर्देश नहीं मिलता, तब तक इन पर रोक लगाना इनके वश की बात नहीं।
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आईएसपीएस ने यह भी कहा कि यह रोक कानूनी, व्यावहारिक और तकनीकी दृष्टि से संभव नहीं है। पोर्न साइट्स पर मौजूद आपत्तिजनक सामग्री के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वहीं, यह भी कहा कि पोर्नोग्राफिक शब्द को परिभाषित करने की जरूरत है क्योंकि इस शब्द का दायरा स्पष्ट नहीं है। साथ ही पूछा है कि क्या खजुराहो की कामुक मुर्तियां भी पोर्नोग्राफी के तहत आती हैं।
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भारत में सभी पोर्न वेबसाइट्स पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में इंदौर निवासी एडवोकेट कमलेश वासवानी ने जनहित याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया है कि महिलाओं के खिलाफ होने वाले ज्यादातर अपराध की एक वजह ऎसी साइट्स भी हैं। कानून के बिना पोर्न वेबसाइट्स पर किसी भी तरह की रोक उचित नहीं होगी।
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न्यायमूर्ति बीएस चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दूरसंचार विभाग को यह बताने के लिए तीन सप्ताह का और समय दिया है कि अश्लील सामग्री वाली इन वेबसाइट्स को देश में किस तरह ब्लॉक किया जा सकता है। केंद्र सरकार ने भी मांगा था विभिन्न मंत्रालयों से परामर्श के लिए समय केंद्र सरकार भी कोर्ट को सूचित कर चुकी है कि देश में अंतरराष्ट्रीय पोर्न वेबसाइट्स को ब्लॉक करना मुश्किल काम है।


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