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फ्यूचर iPhones में आ सकता है इंसानी आंख जितना शानदार कैमरा सेंसर, Apple के नए पेटेंट से खुला राज

iPhone's Camera Updates: iPhones को अपने कस्टमर्स को बेहतर बनाने के लिए Apple लगातार नई दिशा में काम करता है। इसी सिलसिले में Apple ने हाल ही में एक नया पेटेंट हासिल किया है, जो फ्यूचर iPhone कैमरों को प्रोफेशनल सिनेमा कैमरा जितना ताकतवर बना सकता है। इस पेटेंट के मुताबिक, Apple एक ऐसे इमेज-सेंसर पर काम कर रहा है जो '20 स्टॉप्स' तक की डायनामिक रेंज कैप्चर कर सकता है। इसका मतलब है कि इसकी रेंज लगभग उतनी ही रेंज पर पहुंच जाएगी, जितनी इंसानी आंख देख सकती है।

यहां हम इस नए पेटेंट के बारे में विस्तार से जानेंगे। साथ ही यह भी समझेंगे कि ये कैसे हमारे लिए मददगार साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि नया फीचर्स कैसे काम करता है।

क्या iPhone का कैमरा बनेगा सिनेमा कैमरा जितना पावरफुल?

क्या है 'स्टॉप्स'?

फोटोग्राफी की दुनिया में 'स्टॉप्स' शब्द का इस्तेमाल उस कैपेसिटी को दर्शाने के लिए होता है, जिससे कोई कैमरा या सेंसर कितनी मात्रा में प्रकाश (लाइट) कैप्चर कर सकता है। जितना ज्यादा लाइट कैमरा कैप्चर करता है, उतनी ही अच्छी डिटेल, कलर और क्लैरिटी फोटो में मिलती है। ज्यादातर प्रोफेशनल कैमरों की डायनामिक रेंज 13-14 स्टॉप्स होती है। वहीं मोबाइल फोन कैमरे इससे भी कम होते हैं।

इंसान की आंख ( ह्यूमन आई) की बात करें तो वो लगभग 20 स्टॉप्स की डायनामिक रेंज को पहचान सकती है। यही वजह है कि जब हम किसी खूबसूरत सनसेट की तस्वीर क्लिक करते हैं, तो वो वैसा नहीं दिखता जैसा हमने अपनी आंखों से देखा होता है।

Apple उठा रहा बड़ा कदम

Apple का यह नया पेटेंट पहली बार Y.M. Cinema Magazine द्वारा रिपोर्ट किया गया। बता दें कि इसका नाम 'Image Sensor With Stacked Pixels Having High Dynamic Range And Low Noise' है, इसमें एक स्टैक्ड सेंसर का जिक्र किया गया है, जो दो लेयर में काम करता है। जहां एक लेयर लाइट कैप्चर करने के लिए और दूसरी प्रोसेसिंग यानी इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल को संभालने के लिए तैयार किया गया है।

यह डिजाइन iPhones और AR/VR हेडसेट्स जैसे पतले डिवाइसेज के लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है, क्योंकि इसमें एडवांस टेक्नोलॉजी को कॉम्पैक्ट जगह में फिट किया जा सकता है।

क्या है LOFIC तकनीक?

इस पेटेंट में Apple ने LOFIC (Lateral Overflow Integration Capacitor) टेक्नोलॉजी का जिक्र किया है। यह तकनीक हर पिक्सेल को तीन अलग-अलग लाइट लेवल्स में डाटा स्टोर करने की क्षमता देती है। उदाहरण के तौर पर, अगर आप किसी डिम रूम में फोटो क्लिक करते हैं जिसमें एक ब्राइट विंडो भी हो, तो यह सेंसर दोनों स्थितियों को अच्छे से हैंडल कर सकता है । इससे बिना डिटेल खोए या एक्सपोजर बिगाड़े फोटो ली जा सकती है।

नॉइज-कैंसिलिंग भी है खास

इस सेंसर की एक और बड़ी खासियत इसकी इन-बिल्ट नॉइज सेंसरिंग है । हर पिक्सेल में एक छोटा सर्किट होता है जो अनवांटेड शोर (noise) को रियल टाइम में डिटेक्ट और हटाता है। इससे लो-लाइट में तस्वीरें साफ और शार्प आती हैं।

फ्यूचर की तैयारी

अगर Apple इस टेक्नोलॉजी को iPhone या Vision Pro जैसे प्रोडक्ट्स में लाने में कामयाब हो जाता है, तो यूजर्स अपने स्मार्टफोन से ही सिनेमा-ग्रेड HDR वीडियो, लाइफ-लाइक कलर्स और प्रो-लेवल फोटो क्वालिटी हासिल कर सकेंगे।

हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि यह अभी सिर्फ एक पेटेंट है। Apple हर साल सैकड़ों पेटेंट फाइल करता है, और उनमें से सभी फाइनल प्रोडक्ट में इस्तेमाल नहीं होते। लेकिन अगर ये हकीकत में बदला, तो iPhone कैमरा फोटोग्राफी की दुनिया में क्रांति ला सकता है।

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English summary
Will the iPhone's camera become as powerful as a cinema camera and human eye? Apple's new patent reveals the secret
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