एसिड में बदलने लगा है समुद्र का पानी

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    एसिड में बदलने लगा है समुद्र का पानी

    वो दिन दूर नहीं जब हमारी धरती में समुद्र के किनारे केवल हम दूर से ही देखा करेंगे, हाल ही में वैज्ञानिकों ने समुद्र में बढते एसिडिक कटेंट की बढ़ती मात्रा पर चिंता जाताते हुए कुछ निष्‍कर्ष निकाले हैं। आकड़ों के अनुसार अगर इसी मात्रा से भविष्‍य में समुद्र के पानी में एसिड की मात्रा बढ़ती रही तो पानी में रहने वाली करीब 30 फीसद प्रजातियां सदी के आखिर तक विलुप्त हो जाएंगी।

    असल में हम अपनी रोजमर्रा के काम करने के दौरान ढेर सारी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित करते हैं, इस कार्बन डाइआक्‍साइड  उसका ज्यादातर हिस्सा सागर सोख लेते हैं। इस वजह से सागर का पानी अम्लीय होता जा रहा है। इससे समुद्र के अंदर कॉरल या मूंगा की परतें इससे छिलती जा रही है और अन्य प्रजातियों को भी नुकसान हो रहा है।

    वैज्ञानिक इस बात पर भी शोध कर रहे हैं कि भविष्य में हालात और कितने बिगड़ सकते हैं। इसके लिए वे समुद्र में ज्वालामुखी का अध्ययन कर रहे हैं, जहां कार्बन डाइऑक्साइड प्राकृतिक रूप से पानी में मिली रहती है। यह शोध कनाडा के वेंकूवर में हुए सम्मेलन में पेश किया गया।

    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिक इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि अगर वातावरण में ऐसे ही कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन होता रहा, तो समुद्रों का क्या हाल होगा। शोधकर्ताओं द्वारा इकट्ठे किए गए नए आंकड़े बताते हैं कि साल 2100 तक जैव विविधता पर काफी बुरा प्रभाव पड़ेगा, जिससे पानी में 30 फीसदी प्रजातियां खत्म हो सकती हैं। प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर जेसन हॉल स्पेंसर ने इस बारें में जानकारी देते हुए कहा हमने पाया कि पारिस्थितिक तंत्र में तेजी से बदलाव हुआ है। इस सदी के अंत तक समुद्र के पानी में एसिड की मात्रा उच्च स्तर पर पहुंच गई है।

    अगले कुछ साल में एसिड की वजह से जंतुओं के शैल खराब होने लगेंगे और कुछ मूंगे बच नहीं पाएंगे। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि समुद्री पानी में जिस तेजी से परिवर्तन आ रहा है, वो पृथ्वी के इतिहास में अप्रत्याशित है और इस नुकसान से उभरने में हजारों, लाखों साल लग सकते हैं।

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