भारतीय जीपीएस सेटेलाइट के बारे में जानिए 7 खास बातें ?

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    इसरो द्वारा देश के सातवें और आखिरी नेविगेशन सैटेलाइट ले जाने वाला पीएसएलवी-सी33 रॉकेट लॉन्च कर दिया है। इस लॉन्च के साथ ही अब भारत का खुद का जीपीएस नेविगेशन सिस्टम नाविक (एनएवीआईसी) हो गया है।

    इसके बाद से अब हमें मिलिट्री नेविगेशन आदि के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। चलिए आपको बताते हैं भारत के जीपीएस नेविगेशन सिस्टम नाविक के बारे में प्रमुख बातें-

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    पहला फैक्‍ट

    नाविक के लॉन्च के साथ ही भारत के नेविगेशन सिस्टम में सात सैटेलाइट हो जाएंगे, जिससे नेविगेशन सिस्टम अच्छे से काम करेगा और किसी दूसरे देश पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी।

    दूसरा फैक्‍ट

    नाविक को भारत एवं उसके आसपास के 1500 कि.मी. तक के क्षेत्र में रीयल टाइम पोजिशनिंग बताने के लिए डिजाइन किया गया है।

    तीसरा फैक्‍ट

    नाविक सिस्टम बहुत कुछ अमेरिका के जीपीएस (24 सैटेलाइट), रशिया के ग्लोनएस (24 सैटेलाइट), यूरोप के गैलिलियो (27 सैटेलाइट) और चीन के बीडोऊ (35 सैटेलाइट) की भांति ही है।

    चौथा फैक्‍ट

    इस सिस्टम का उपयोग नौसेना के नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, गाडि़यों की ट्रैकिंग, मोबाइल फोन के इंटिग्रेशन, मैप और जियोग्राफिकल डेटा, विजुअल व वॉयस नेविगेशन के लिए किया जाएगा।

    पांचवा फैक्‍ट

    इससे पूर्व भी इस नेविगेशन सिस्टम में 6 सैटेलाइट लॉन्च की जा चुकी हैं। 10 मार्च को IRNSS-1F, 1 जुलाई 2013 को IRNSS-1B, 4 अप्रैल 2014 IRNSS-1C, 16 अक्टूबर 2014 को IRNSS-1C, 28 मार्च 2015 को IRNSS-1D और 20 जनवरी 2016 को IRNSS-1E लॉन्च हुई थीं।

    छटवां फैक्‍ट

    इसरो के अधिकारियों की माने तो इन सातों उपग्रहों की कुल लागत 1,420 करोड़ रुपए थी और इसका मिशन जीवन 12 वर्ष का है।


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    English summary
    Its time to make way for our own desi navigation system — the Indian Regional Navigation Satellite System or IRNSS on our mobile phones.
    Opinion Poll

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