चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को ढूंढने में नाकाम रहा नासा का अंतरिक्षयान
आपने चंद्रयान-2 के बारे में तो जरूर सुना होगा। चंद्रयान-2 भारत का एक बेहद खास मिशन था जो अपने पहले प्रयास में असफल हो गया। 7 सितंबर 2019 को चंद्रयान-2 भारत की करोड़ों उम्मीद और भरोसो के ढ़ोते हुए चांद पर उतरने वाला था लेकिन महज 2 किमी. की दूरी पर चंद्रयान-2 से हमारा संपर्क टूट गया। वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 में मौजूद विक्रम लैंडर को ढूंढने की काफी कोशिश की लेकिन वो अभी तक मिल नहीं पाया है।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने भी चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को ढूंढने की कोशिश में लगी हुई है लेकिन उसे भी सफलता नहीं मिल पाई है। नासा ने कुछ दिन पहले एक बार विक्रम लैंडर को खोजने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे । इस बार एक बार फिर नासा भारतीय चंद्रयान-2 को खोजने में असफल रहा है। नासा के अंतरिक्ष यान ने कुछ तस्वीरें निकाली है, लेकिन वहां उन्हें विक्रम लैंडर दिखाई नहीं दिया है।
नासा के एक वैज्ञानिक ने इस बारे में बताते हुए कहा कि अंतरिक्षयान विक्रम लैंडर का पता नहीं लगा पाया है। नासा के वैज्ञानिक ने बताया कि विक्रम का पता ना लग पाने के दो कारण है पहला कि विक्रम लैंडर उस जगह पर नहीं है जहां की पिक्चर अमेरिकी अंतरिक्षयान ने ली है। वहीं इसका दूसरा कारण है कि विक्रम लैंडर चंद्रमा के उस हिस्से में है, जहां छाया है, जिसकी वजह से विक्रम लैंडर दिख नहीं पा रहा है।
आपको बता दें कि भारत ने 22 जुलाई 2019 को भारत से चंद्रयान-2 को चांद की यात्रा के लिए विदा किया था। चांद पर चंद्रयान-2 के विक्रम लैंडर को 5 सितंबर को उतरना था लेकिन कुछ देरी के कारण विक्रम को करीब दो दिन की देरी हुई। उसके बाद भी आखिर में चंद्रमा से सिर्फ दो किमी की दूरी तक पहुंचने पर इसरो यानि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान का संपर्क विक्रम लैंडर से टूट गया।
उसके बाद भारत के इसरो वैज्ञानिकों ने विक्रम लैंडर को ढूंढने की काफी कोशिश की लेकिन वो ऐसा करने में कामयाब नहीं हो पाए और आखिरकार भारत का चंद्रयान-2 का पहला प्रयास असफल हो गया। आपको बता दें कि भारत के इस प्रोजेक्ट में करीब 978 करोड़ रुपए की लागत लगी थी। चंद्रयान-2 में तीन हिस्से है, पहला ऑर्बिटर जिसका वजह 2,379 किलोग्राम, आठ पेलोड था। चंद्रयान-2 का दूसरा भाग विक्रम लैंडर था, जिसका वजन करीब 1,471 किलोग्राम, 4 पेलोड है और तीसरा पार्ट प्रज्ञान रोवर है, जिसका वजह 27 किलोग्राम, 2 पेलोड है। चंद्रयान-2 के बारे में तमाम जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर इसकी विस्तृत स्टोरी पढ़ सकते हैं।


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