सपनों को रिकॉर्ड करने की पूरी कहानी, सुनिए हिंदी गिज़बॉट की जुबानी

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आपने बॉलीवुड की एक फिल्म फुकरे रिटर्न्स देखी है...? इस फिल्म में चूचा नाम एक बेहद शानदार कैरेक्टर है, जिसे वरुण शर्मा ने निभाया है। इस फिल्म में दिखाया गया है कि चूचा नाम के कैरेक्टर को सपने में ऐसी चीज दिखती है, जो कुछ देर बाद होने वाली होती है। चूचा अपने सपनों में जो देखता है उससे हक़ीकत में उसे ख़जाना मिल जाता है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा अगर सच में होने लगे तो क्या होगा...?

सपनों को रिकॉर्ड करने की पूरी कहानी, सुनिए हिंदी गिज़बॉट की जुबानी

 

आप सोच रहें है सपना देखकर कोई ख़जाना कैसे ढूंढ सकता है...? क्या टेक्नोलॉजी की दुनिया में ऐसा भी संभव है...? हमलोग जो भी सपने में देखते हैं, वो हमें याद नहीं रहता है। दुनिया का हर इंसान सपना देखता है लेकिन वो अपने हर सपना का सिर्फ कुछ प्रतिशत भाग ही याद रख पाता है और धीरे-धीरे उसे भी भूल जाता है।

सपनों के आंकड़े

सपनों के आंकड़े

हर इंसान औसतन रोज 4-6 सपने देखता है लेकिन वो पूरी जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा सिर्फ 10% सपनों को ही याद रख पाता है। कुछ लोगों को तो इतने भी याद नहीं रहते और इसलिए वो कहते हैं कि उन्हें सपने नहीं आते हैं। हालांकि सपने दुनिया में हर इंसान को आते हैं। सपने में ऐसी कई चीजें आती है जो बेहद अद्भूत, अकल्पनिय और अविश्वसनीय होती है। ऐसे में अगर उन सपनों को रिकॉड कर लिया जाए तो हम क्या कर सकते हैं..?

जी हां, सोचिए अगर हम अपने सपनों को रिकॉर्ड करना शुरू कर दें तो क्या-क्या हो सकता है...? क्या इंसान सपने देखकर भी पैसे कमा सकता है...? अगर इंसान के सपने को रिकॉर्ड किया जाए तो वैसे सपनों जो काफी उच्चस्तरीय हो, उन पर प्रॉड्यूसर फिल्में भी बना सकते हैं। उन फिल्मों से प्रॉड्यूसर लाखों रुपए कमा सकते हैं और उन पैसों का कुछ हिस्सा सपने देखने वालों को भी दिया जा सकता है।

इमेज क्रेडिट:- The Mystery of Dreams

सपनों में कई लोगों ने किया कमाल
 

सपनों में कई लोगों ने किया कमाल

Structure of Atoms यानि परमाणु संरचना की खोज Niels Borh ने सपने देखते वक्त ही थी, जिसे आज पूरी दुनिया पढ़ती है। दुनिया की फर्स्ट पीरियोडिक टेबल की खोज भी Dmitri Meendeleev ने सपने देखते वक्त ही की थी, जिसको कमेस्ट्री में पूरी दुनिया पढ़ती है। Albert Einstein का नाम को आपने सुना ही होगा। उन्होंने भी सपने में भी रिलेटिविटी की थ्योरी को ढूंढा और सोल्व किया था। ऐसे और भी बहुत सारे लोग दुनिया में हैं।

ऐसे कुछ महान लोग सपनों में दुनिया की कई बड़ी-बड़ी प्रॉबल्म्स को सोल्व कर देते हैं लेकिन वो उसे याद ना रख पाने के कारण जागती दुनिया में नहीं कर पाते हैं। ऐसे में अगर उनके सपनों को रिकॉर्ड कर लिया जाए तो सपनों की दुनिया को जागती दुनिया में तब्दिल किया जा सकता है। अब आप सोच रहें होंगे कि सपनों को रिकॉर्ड कैसे किया जा सकता है।

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वैज्ञानिकों के अनुसार...

वैज्ञानिकों के अनुसार...

हम आपको बता दें कि बढ़ती टेक्नोलॉजी को कोई रोक नहीं सकता है। इंसान की टेक्नोलॉजी इतनी आगे बढ़ गई है कि अब सपनों को भी रिकॉर्ड किया जा सकता है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक डी.आर. जॉन एलन होब्सन और रॉबर्ट मैककार्ले के अनुसार सपने इंसान को तब आते हैं जब उनका दिमाग Rapid Eye Movement यानि REM Stage में होता है।

इस स्टेज में आपका दिमाग सबसे ज्यादा एक्टिव होता है। इस स्टेज में आपका दिमाग आपको दुनिया भर की तरह तरह की इमेज, वीडियो, इमेजीनेशन, इमोशन, एक्टिविटीज को दिखाता है, जो आपके कंट्रोल में नहीं होता है। Tel Aviv University के एक पूर्व स्टूडेंट सेर्फ़ ने कहा कि, हम यह कह सकते हैं कि हमने सपने में अपने मम्मी-पापा को देखा था लेकिन हम ये ठीक-ठीक नहीं कह सकते कि मम्मी-पापा ने सपने में क्या पहना था।

नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी में एक इजरायली न्यूरोसाइंटिस्ट मोरन सेर्फ़, जागते और सोते वक्त इंसानों द्वारा लेने वाले निर्णयों की प्रक्रियाओं का अध्ययन करते हैं - उन्होंने अपने शोध के पार्ट में बताया कि, वह "विशिष्ट मस्तिष्क कोशिकाओं (specific brain cells) की गतिविधि को सुनने के लिए" ब्रेन की सर्जरी के दौर से गुजर रहे लोगों के दिमाग पर इलेक्ट्रोड लगा रहे हैं। इससे उसे पता चलता है कि लोग क्या सोच रहे हैं।

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सपनो को रिकॉर्ड करने का प्रोसेस

सपनो को रिकॉर्ड करने का प्रोसेस

दुनिया के मशहूर मनो विशेषज्ञ के मुताबिक SIGMUND FREUD सपने इंसानों के अचेत यानि Unconscious Mind के प्रॉडक्ट्स हैं, जो हमारे मन में दबे हुए ना पूरे हुए मनोकामनाओं और खास इच्छाओं का प्रतिक है। इन्होंने ने ही अपने स्टडी में कहा था कि दुनिया में सभी सपने देखते हैं और जो ऐसा कहते हैं कि वो नहीं देखते, इसका मतलब उन्हें सपने याद ही नहीं रहते।

आप ब्रेन वेव्स के बारे में जानते होंगे। ब्रेन वेव्स कुछ रेडियो वेव जैसे ही होते हैं। ब्रेन वेव एक इलेक्ट्रो मैगनेटिक रेडिशन का फॉर्म है। ये वेव लाइट की स्पीड से ट्रैवल करते हैं। जब भी हमारा दिमाग कुछ सोचता है तो हजारों न्यूरोन्स सेम फ्रीक्वेंसी से एक्टिवेट होते हैं और इससे एक वेव जनरेट होता है। यही वेव करीब 10-100 Cycle/Sec के स्पीड से कंपन यानि ocssilate करते हैं।

ऐसा ही काम रेडियो वेव के केस में भी होता है। रेडियो वेव भी इलेक्ट्रो मैगनेटिक रेडिशन का फॉर्म होती है। रेडियो वेव भी इसी तरह कंपन करती है, जिसकी स्पीड 5 Crore से 100 Crore per/cycle होती है। वैज्ञानिकों ने रेडियो के इसी phenomena को ब्रेन वेव के लिए भी इस्तेमाल किया। जिसके जरिए वैज्ञानिकों को ब्रेन वेव के डेटा को इल्कट्रोनिक डिवाइस से कनेक्ट करके ब्रेन एक्टिविटीज़ का विश्लेषण करना शुरू किया।

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दिमाग में बनते हैं न्यूरल पैटर्न्स

दिमाग में बनते हैं न्यूरल पैटर्न्स

आपको बता दें कि जब भी हम सपने देखते हैं या किसी चीज को देखते हैं तो हमारे दिमाग में न्यूरोन्स काफी तेजी से हरकत करता है और उस हरकत की वजह से हमारे दिमाग में एक न्यूरोलॉजिकल पैटर्न बनता है। इस बात को आप ऐसे समझें कि जब भी आप अपने घर, मोबाइल, या किसी चीज को देखते हो तो आपके दिमाग में उसका चीज का एक न्यूरल पैटर्न बनता है और जब आप उसी चीज को सपने में देखते हैं तो वहां भी वैसा ही न्यूरल पैटर्न बनता है।

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ऐसे में जब भी आप जागती दुनिया की चीजों को सपने में देखतें हैं तो सेम न्यूरल पैटर्न्स तेजी से एक्टिवेट होने लगते हैं, उनकी फ्रीक्वेंसी तेजी से बढ़ने लगती है। इन्हीं फ्रीक्वेंसी को वेब फॉर्म में रिकॉर्ड करने की तैयारी वैज्ञानिक कर रहे हैं। सीसीएन की एक फीचर रिपोर्ट के मुताबिक जापान के क्यूटो यूनिवर्सिटी के एक शोधकर्ता Yukiyasu Kamitani का कहना है कि सपनों की फ्रीक्वेंसी को रिकॉर्ड और डीकोड यानि एक्चुवल वीडियो और ऑडियो में बदलने के लिए आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस एल्गोरिद्दम और डेटा एनेलाइज़िंग का इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका मानना है कि वो ऐसा कर सकते हैं और वो ऐसा करना भी चाहता है।

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नींद में दिमाग भेजता है इलेक्ट्रिक सिंग्नल्स

नींद में दिमाग भेजता है इलेक्ट्रिक सिंग्नल्स

इसको अगर हम सरल शब्दों में समझें तो Texas University के एक अमेरिकी न्यूरोसाइंटिस्ट David M. Schnyer के साथ ड्रीम रिचर्सर पर काम कर रहे Daniel Oldis ने बताया कि, सोते वक्त REM स्टेज के दौरान, इंसान पैरालाइज़्ड लोगों की तरह हो जाता है, इसलिए वो अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते। हालांकि जब आप नींद में सपने देखते हो तो आपका दिमाग उस कंडीशन में भी आपके पैरों को इंलेक्ट्रिकल सिंग्नल्स भेजता है।

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उन्होंने बताया कि Nerve impulses (तंत्रिका आवेग) नींद के दौरान भी मांसपेशियों में जाते हैं। डेविड और डेनियल उन इलेक्ट्रिक सिंग्नल्स को ट्रैक करने की कोशिश कर रहे हैं। लोग सोते वक्त जो सपने देखते हैं, नींद में जो बोलते हैं दिमाग उसके लिए इलेक्ट्रिक सिंग्नल्स को होंथ और गले को भी भेजता है। ऐसे में ये वैज्ञानिक उन्हीं संकेतों को पहचानने की कोशिश कर रहे हैं ताकि सपने को पूरी तरह से पता किया जा सके।

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पूर्व राष्ट्रपति की सलाह

पूर्व राष्ट्रपति की सलाह

इसके जरिए लोगों को सपनों में हो रही फ्रीक्वेंसी को पढ़ लेगा और उसे डीकोड करके ठीक उसी इमेज और वीडियो को भी देखा जा सकेगा। ऐसे में आप अपने सपनों को एक मूवी यानि फिल्म की तरह भी देख पाएंगे। भारत के मिशाइल मैन कह जाने वाले दुनिया के एक महान स्पेस साइंटिस्ट और भारत के पूर्व राष्ट्रपति का कहना था कि सपनों को पूरा करने के लिए पहले सपने को देखना जरूरी है। उनकी इस बात का महत्व अब आप और भी अच्छे तरीके से समझ सकते हैं।

Reseach Source:- www.fromthegrapevine.com , CNN Health ,

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English summary
Is it also possible to record dreams in the world of technology ...? Whatever we see in our dreams, we do not remember it. Every person dreams of the world but he only remembers only a few percent of his every dream and gradually forgets him too. Let us elaborate on this.

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