अगर ऐसा हुआ तो भारत में बंद हो जाएगा WhatsApp
भारत में व्हाट्सऐप की लोकप्रियता काफी बढ़ चुकी है। एक आंकड़ों के मुताबिक पूरी दुनिया में व्हाट्सऐप यूजर्स की मासिक संख्या 1.2 अरब है, जिनमें भारतीय यूजर्स की संख्या करीब 20 करोड़ है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत व्हाट्सऐप के लिए कितना बड़ा मार्केट है। हालांकि अब व्हाट्सऐप के ऊपर खतरा पहले से थोड़ा ज्यादा मंडराने लगा है।

ऐसा इसलिए हुआ है कि भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए एक नए नियम पर विचार कर रही है। अगर वो नियम लागू हो जाता है तो यूजर्स को व्हाट्सऐप की सर्विस पंसद नहीं आएगी और शायद भारत में व्हाट्सऐप बंद भी हो सकता है। दरअसल, भारत में व्हाट्सऐप के जरिए फेक न्यूज़ का सिलसिला दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। इसकी वजह से कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं। खासतौर पर इस वक्त आम चुनाव आने वाले हैं और इस वजह से व्हाट्सऐप के जरिए गलत और झूठ को फैलाने का काम बढ़ गया है। ऐसे में सरकार इसपर कुछ नए कदम उठाने के बारे में सोच रही है।
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दरअसल, व्हाट्सऐप अपने यूजर्स के मैसेजों की गोपनियता बनाए रखने के लिए एक प्रक्रिया का पालन करती है, जिसे एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन कहते हैं। इस प्रक्रिया की वजह से भेजने वाले संदेश को प्राप्तकर्ता के अलावा कोई भी पढ़ नहीं सकता है। यहां तक किस व्हाट्सऐप कंपनी खुद भी किसी दो यूजर्स के बीच की चैटिंग को पढ़ नहीं सकती है। ऐसे में गलत ख़बर फैलाने वाले लोग बचकर निकल जाते हैं। भारत सरकार इस प्रक्रिया को हटाना चाहती है ताकि फेक न्यूज़ फैलाने वाले लोगों को पकड़ा जा सके। इसपर व्हाट्सऐप का कहना है कि एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन के बिना व्हाट्सऐप पूरी तरह से एक नया प्रॉडक्ट बन जाएगा।
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इस मसले में व्हाट्सऐप के संचार विभाग के अधिकारी हेड कार्ल वूग ने बुधवार को आईएएनएस से बातचीत के दौरान बताया कि, "भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित नियमों में सबसे ज्यादा चिंता का विषय, मैसेजों का पता लगाने पर जोर देना है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा प्रस्तावित बदलाव जो लागू होने जा रहे हैं, वह मजबूत गोपनियता सुरक्षा के अनुकूल नहीं है, जिसे दुनियाभर के यूजर्स चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि हम एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन मुहैया कराते हैं, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद हमें इस प्लेटफॉर्म को नए सिरे गढ़ने की जरूरत पड़ेगी और ऐसी स्थिति में मैसेजिंग सेवा मौजूदा स्वरूप में उपलब्ध नहीं रहेगी। नए नियमों के लागू होने के बाद भारतीय बाजार से बाहर निकलने की संभवाना पर सहमति जताते हुए उन्होंने इसे खारिज नहीं किया। इसपर उन्होंने कहा कि इसपर अनुमान लगाने से कोई मदद नहीं मिलेगी। इस मामले पर भारत में चर्चा करने के लिए एक प्रक्रिया पहले से ही हो रही है।


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