कैपेसिटिव टच स्क्रीन ज्यादा बेहतर है या फिर रजिस्टिव टच स्क्रीन?

टच स्क्रीन का शौक सभी को होता है हो भी क्यों न आखिर टच स्क्रीन नए जमाने की तकनीक है। पहले जहां केवल टच स्क्रीन फोन आते थे वहीं अब इसके दो वर्जन बाजार में मौजूद है पहला रजिस्टिव टच स्क्रीन और दूसरा कैपेसिटिव टच स्क्रीन, हो सकता है आप मे से कई लोग दोनों के बीच का अंतर जानते हों लेकिन काफी लोगों को रजिस्टिव और कैपेसिटिव के बीच क्या अंतर है इसके बारे में कोई जानाकारी नहीं है। हिन्दी गिजबोट आज आपको रजिस्टिव और कैपेसिटिव टच स्क्रीन में क्या अंतर है और इनमें से कौन सी स्क्रीन ज्यादा बेहतर है इससे जुड़ी सभी जानकारियों के बारे में बताएगा।
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रजिस्टिव टच स्क्रीन शुरुआती फोन में सबसे पहले आई थी इसलिए कैपेसिटिव के मुकाबले ये पुरानी हो चुकी है। रजिस्टिव टच स्क्रीन में कई सारी लेयर होती हैं हम जब रजिस्टिव स्क्रीन में टच करते हैं तो पहली वाली लेयर दूसरी लेयर में दवाब डालती है और दूसरी वाली तीसरी लेयर में इस तरह से एक के बाद एक टच ट्रांसफर होता है लेकिन कैपेसिटिव टच स्क्रीन के काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है।
कैपेसिटिव टच स्क्रीन में कई लेयर की जगह इलेक्ट्रोड काम करते हैं जो स्क्रीन के सेंस को कैच करते हैं। जैसे ही आप स्क्रीन में अपनी फिंगर लगाते है वहां के इलेक्ट्रोड एक्टिव हो जाते हैं।
कौन सी स्क्रीन वाला फोन खरीदें
रजिस्टिव के मुकाबले कैपेसिटिव स्क्रीन फोन खरीदें क्योंकि ये ज्यादा बेहतर तरीके से काम करती है वैसे बाजार में इस समय कई कैपेसिटिव स्क्रीन स्मार्टफोन उपलब्ध है जैसे
कैपेसिटिव स्क्रीन स्मार्टफोन
- एप्पल आईफोन 3जी एस
- सैमसंग ओमनिया एचडी
- एलजी क्रिस्टल
- नोकिया एन 97
- सैमसंग जेट
- एचटीसी टैटू
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