नए iPhone बेचने के लिए पुराने iPhones को खुद स्लो कर देती है ऐपल
वर्ल्ड की टॉप यूनिवर्सिटी में से एक मानी जाने वाली हावर्ड यूनिवर्सिटी में इसका खुलासा हुआ है। हावर्ड ने अपनी एक रिसर्च में बताया है कि एपल अपने लेटेस्ट मॉडल की बिक्री के लिए अपने पुराने मॉडल्स को स्लो कर देती है। रिसर्च में कहा गया कि हर बार नए आईफोन के रिलीज से पहले 'आईफोन स्लो' कीवर्ड कई बार सर्च किया जाता है। इसे सर्च करने की संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले में इस समय कई दफा बढ़ जाती है। इसका मतलब है कि आईफोन के रिलीज से पहले ही यूजर्स को एहसास होने लगता है कि उनका फोन स्लो हो गया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐपल नए ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ छेड़छाड़ करती है, जिसकी वजह से नया ऑपरेटिंग सिस्टम केवल लेटेस्ट मॉडल पर ही 100 फीसदी काम करता है और पुराने यूजर्स को अचानक ही ओएस से जुड़ी दिक्कतें आने लगती हैं। ऐसे में कंपनी अनजाने में ही यूजर्स को इस बात के लिए प्रेरित करती है कि वह नया आईफोन खरीदें।
ऐसे में यूजर्स दो तरीके से कंपनी की इस रणनीति का शिकार बनते हैं। एक तो ये कि यूजर्स लेटेस्ट मॉडल का आईफोन खरीदते हैं। इसके अलावा नए फोन के लॉन्च पर कंपनी पुराने आईफोन पर भी ढेरों डिस्काउंट देती है। कुछ यूजर्स पुराना हैंडसेट ही खरीदते हैं और उन्हें अंदाजा नहीं होता है कि पैसे खर्च करके आप फिर से वही धीमा आईफोन खऱीद लाए हैं।
रिसर्च में कहा गया कि करीब 50 फीसदी यूजर्स दोबारा आईफोन ही लेते हैं। इसका मतलब है कि कि जहां कंपनी का 1 आईफोन बिक रहा था, वहां अब कंपनी करीब 1.5 गुना फोन बेच रही है। सामने आ रही रिपोर्ट्स में कहा गया है कि हर कंपनी चाहती है कि उसका लेटेस्ट प्रॉडक्ट ज्यादा से ज्यादा बिके। इसके लिए कंपनी इस तरह की ट्रिक्स का इस्तेमाल करती हैं। बेहतर है कि यूजर्स पहले से ज्यादा सावधान रहे और इस तरह के छलावे में न फंसे।


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