Mitron ऐप का पाकिस्तानी कनेक्शन है मित्रों...!
Mitron ऐप के बारे में तो आपने सुना ही होगा। आपको बहुत गर्व भी हो रहा होगा कि ये ऐप भारतीय है और चीन के लोकप्रिय ऐप टिकटॉक को टक्कर देने के लिए तैयार है, लेकिन क्या आपको सच में इस ऐप पर गर्व करना चाहिए...? क्या इस ऐप के बारे में आपने पूरी जानकारी ली है...? आइए हम आपको इस ऐप के बारे में कही जा रही पाकिस्तानी कनेक्शन के बारे में बताते हैं।

दरअसल, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक Mitron ऐप को एक पाकिस्तानी सॉफ्टवेयर डेवलपर Qboxus से खरीदा गया है। इस बात का खुलासा हाल में आई एक रिपोर्ट में किया गया है। इस ऐप को पाकिस्तान की सॉफ्टवेयर डेवलपर ने डेवलप किया है लेकिन भारतीय द्वारा खरीदे जाने की वजह से इस ऐप को काफी ज्यादा पहचान मिल रही है। इसके अलावा बहुत सारे भारतीय लोगों को इस ऐप का भारतीय होना इसलिए लगता है क्योंकि इसका नाम Mitron है।
क्यों लोकप्रिय हुआ मित्रों
मित्रों शब्द का अर्थ दोस्त होता है और ये शब्द भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी द्वारा अक्सर बोला जाता है। इस वजह से ये ऐप भारतीय लोगों को देसी होने का अहसास दिलाता है। अब एक नई रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया जा रहा है कि ये ऐप असल में TicTic ऐप का ही एक रीब्रांड किया हुआ वर्ज़न है। इस TicTic ऐप को पाकिस्तान की डेवलपर कंपनी Qboxus ने बनाया है।
News 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक Qboxus के संस्थापक और सीईओ इरफान शेख ने न्यूज़ 18 को बताया कि उनकी कंपनी सोर्स कोड बेचने का काम करती है। उनसे सोर्स कोड को खरीदने के बाद खरीदार उसे कस्टामाइज़ करते हैं और फिर उसे ऐप के तौर पर लॉन्च करते हैं। उन्होंने मित्रों ऐप को सोर्स कोड को 34 डॉलर यानि 2500 रुपए में बेचा है। उस सोर्स कोड को कस्टमाइज करके भारतीय डेवलपर ने Mitron ऐप के नाम से लॉन्च किया है।
पाकिस्तानी डेवलपर का क्लेम
इरफान शेख का कहना है कि भारतीय डेवलपर ने उनके सोर्स कोड का इस्तेमाल करके ऐप लॉन्च किया, इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि उन्होंने सोर्स कोड के लिए पैसा दिया और उसका इस्तेमाल किया, जो गलत नहीं है। लेकिन समस्या उन लोगों से हो रही है, जो इस ऐप को भारत में निर्मित ऐप बता रहे हैं। ये बात पूरी तरह से सच नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत के डेवलपर ने इस ऐप में अपनी तरफ से कोई बदलाव नहीं किया है।
आपको बता दें कि अभी तक मित्रों ऐप को बनाने वाले निर्माता की पुष्टि नहीं हुई है। हम भी कई दिनों से कथित तौर पर मित्रों ऐप के निर्माता से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन ऐसा कर नहीं पा रहे हैं। इस ऐप के निर्माता के बारे में कहा जा रहा है कि इसे आईआईटी रूड़की के एक छात्र शिवांक अग्रवाल ने बनाया है। अब इस ऐप को इनती लोकप्रियता मिलेगी इसका अंदाजा किसी को नहीं होगा।
टिकटॉक की गिरती लोकप्रियता का फायदा अचानक से मित्रों ऐप को हुआ और उनके डेवलपर्स इसके लिए तैयार नहीं थे। इस वजह से लोगों ने इस ऐप की सराहना तो जरूर की लेकिन रिव्यू में लिखा कि इसमें बहुत सारे सुधार होने की जरूरत है। हमने इस ऐप की प्राइवेसी पॉलिजी और इसको बनाने वाले लोगों के बारे में थोड़ी बहुत जांच-पड़ताल की और हमे कुछ भी खास जानकारी नहीं मिली।
मित्रों की कोई प्राइवेसी पॉलिसी नहीं
गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद मित्रों ऐप डेवलपर के वेब पेज पर अगर आप जाओगे तो एक वेबसाइट आपको shopkiller.in पर ले जाएगी। shopkiller.in की वेबसाइट पर आप जाओगे तो आपको ये पेज खाली नजर आएगा। उसके अलावा इस पेज में Not Secure लिखा हुआ भी दिखाई देगा।
इसका मतलब साफ और स्पष्ट है कि इस ऐप में कुछ भी सिक्योर नहीं है। इस ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी में भी आप जाएंगे तो आपको कुछ नहीं मिलेगा। अब इस ऐप को साइन इन करने के लिए आप देखेंगे कि ये ऐप बहुत सारी चीजों की पर्मिशन मांगता है, जिसकी जरूरत इस ऐप को नहीं है और उसकी कोई प्राइवेसी पॉलिसी भी नहीं है। ऐसे में वो ऐप यूज़र्स के डेटा के साथ क्या कर रहा है, ये किसी को पता नहीं है।


Click it and Unblock the Notifications








