भारतवंशी वैज्ञानिक ने किया कमाल,स्‍मार्ट कपड़े पता करेंगे बीमारी

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स्‍मार्टफोन, स्‍मार्टटीवी के बाद अब स्‍मार्ट कपड़े भी आने वाले है, ये कमाल किया है भारतवंशी वैज्ञानिक कुनाल मनकोदिया ने जो इस दिशा में काफी दिनों से शोध करने में लगे हुए हैं।

अब आपको अपनी बीमारी बताने के लिए चिकित्सक के पास जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि यूनिवर्सिटी ऑफ रोड आईलैंड के एक भारतवंशी वैज्ञानिक ने एक ऐसा स्मार्ट कपड़ा विकसित किया है, जो न सिर्फ आपकी बीमारी की पहचान करेगा, बल्कि इससे संबंधित आंकड़े दूर स्थित चिकित्सक के क्लीनिक तक भेजेगा, जिसके बाद चिकित्सक आंकड़ों का अध्ययन कर आपको परामर्श देंगे।

अब स्‍मार्ट कपड़े पता करेंगे बीमारी

यूनिवर्सिटी की वियरेबल बायोसेंसिंग लैबोरेटरी के निदेशक कुनाल मनकोदिया इस बात पर शोध कर रहे हैं कि दस्ताने, मौजे, कपड़े और यहां तक कि जूतों को किस प्रकार उच्च तकनीक के उपकरणों में बदला जाए, जो लोगों को स्वस्थ बनाए और उनके जीवन में सुधार करे।

मनकोदिया ने कहा, "हम अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के युग में जी रहे हैं, खासकर स्वास्थ्य के क्षेत्र में। मनकोदिया का शोध सेंसर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स व सॉफ्टवेयर युक्त स्मार्ट कपड़ों के विकास पर केंद्रित है, जो मरीजों से स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों को इकट्ठा कर सके और उसे चिकित्सक तक भेज सके। मनकोदिया का दल स्मार्ट दस्ताने पर काम कर रहा है, जिसकी अंगुलियां तथा अंगूठे सेंसयुक्त हैं, जो पारकिंसंस बीमारी का लक्षण थरथराहट व कठोरता की जांच कर सकता है।

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गुजरात के राजकोट स्थित सौराष्ट्र विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र मनकोदिया ने कहा, "पारकिंसंस बीमारी से पीड़ित लोगों को चलने-फिरने से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है, यहां तक कि वे लंबी दूरी तक चल भी नहीं पाते।

उन्होंने कहा, "दस्ताना मरीज को उनके स्वास्थ्य की देखभाल का विकल्प प्रदान करेगा और गिरने या किसी तरह की दुर्घटना से भी बचाएगा। इन दस्‍तानों का उत्‍पादन कब से शुरु होगा ये इस बात निर्भर करता है शोध कब तक पूरा होता है लेकिन एक बात तय है हम टेक्‍नालॉजी के उस दौर में जी रहे हैं जहां पर हर रोज नए प्रयोग और अविष्‍कार होने में लगे हुए हैं।

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English summary
unal Mankodiya, Director of the university's Wearable Biosensing Laboratory is researching how to transform gloves, socks, clothing and even shoes into high-tech items that will make people healthier -- and improve their lives.
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