यूजर को मुसीबत में डाल सकती हैं, स्मार्टफोन से जुड़ी ये 6 बातें
क्योरिटी प्रोवाइडर कंपनी साइटलॉक की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर यूजर्स की उपस्थिति साइबर अटैक में अहम होती है।
इंटरनेट की दुनिया में सायबर अटैक और हैकर्स का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर रैनसमवेयर और पेट्या वायरस अटैक ने भारत समेद पूरे वर्ल्ड को प्रभावित किया। हाल ही में खबरें सामने आईं जिनमें कहा गया कि रिलायंस जियो यूजर्स का डेटा साइट से लीक हो गया। हालांकि इस मामले अभी पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि इस तरह के हैकिंग और सायबर हमलों से बचने के लिए यूजर्स को सावधान रहना चाहिए।
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कई बार स्मार्टफोन यूजर्स अनजाने में ही वो गलतियां कर देते हैं, जो उन्हें आगे जाकर मुसीबत में डाल सकती हैं। आज हम आपको स्मार्टफोन से जुड़ी जरूरी बातें बता रहे हैं, जिन्हें फॉलो कर आप अपने फोन से जुड़े रिस्क कम कर सकते हैं।
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#1
जब भी स्मार्टफोन यूजर्स किसी भी ऐप को डाउनलोड कर इंस्टॉल करते हैं, तो उस समय यूजर से परमिशन मांगी जाती है। ऐसे में अक्सर यूजर्स बिना पढ़े परमिशन दे देते हैं, जो बाद में आपको नुकसान पहुंचा सकता है।
#2
ऐप इंस्टॉल करते वक्त डाटा को एक्सेस करने का ऑप्शन आता है। प्लेस्टोर पर इस समय हजारों फेक और इंफेक्टेड ऐप्स मौजूद हैं, ऐसे में किसी भी ऐप को डेटा एक्सेस की परमिशन न दें। इससे यूजर्स की निजी जानकारी हैक होने का खतरा रहता है।
#3
ध्यान रहे कि अपने बैंक अकाउंट, पासवर्ड की डिटेल आदि स्मार्टफोन में सेव न करें। साथ ही यह सभी जानकारी ई-मेल आईडी पर भी न रखें।
#4
अगर फोन से जुड़ी मुसीबत से बचना चाहते हैं, तो बड़े लेवल पर इस्तेमाल होने वाले ऐप्स को ही यूज करें। प्लेस्टोर पर कई फेक ऐप्स मौजूद हैं, जो देखने में बिल्कुल रीयल ऐप्स के जैस ही लगते हैं। ये ऐप्स फोन में इंस्टॉल होने के बाद यूजर्स की जानकारी थर्ड पार्टी को पहुंचा देते हैं।
#5
अगर आपको अपने डाटा की सुरक्षा का खतरा है या फिर ये लगता है कि आपका डाटा हैक किया गया है, तो तुरंत सर्विस प्रोवाइडर और साइबर सेल को सूचित करें। जितनी देर करेंगे उतनी ही आपकी परेशानी बढ़ती जाएगी।
#6
फोन में वायरस के खतरे को कम करने के लिए यूजर्स फोन की सिक्योरिटी सेटिंग में जाकर परमीशन सेक्शन को कस्टमाइज कर सकते हैं। अगर यूजर ने अनजाने में ही ऐप को परमिशन दी हुई है, तो उसे अनइंस्टॉल कर दोबारा इंस्टॉल किया जा सकता है।
#7
सिक्योरिटी प्रोवाइडर कंपनी साइटलॉक की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर यूजर्स की उपस्थिति साइबर अटैक में अहम होती है। ऐसी वेबसाइट्स जो ट्विटर, इंस्टाग्राम या फेसबुक से लिंक होती हैं, उनके हैक होने की संभावना 1.5 गुना ज्यादा होती है।


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