कंप्यूटर के कृत्रिम दिमाग से खतरे में पड़ा फेसबुक, साइंटिस्ट ने बताया रिस्क

By Neha
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How to Stop seeing iritating posts on facebook? (Hindi)

कंप्यूटर की कृत्रिम बुद्धी यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने फेसबुक को भी खतरे में डाल दिया। दरअसल फेसबुक की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इतनी स्मार्ट हो गई है कि उसने कम्यूनिकेशन को बेहतर बनाने के लिए खुद की अलग कोड लैंग्वेज डेवलप कर ली। जब एक्सपर्ट और साइंटिस्ट को इस बारे में पता चला तो इसे रिस्क मानते हुए फेसबुक ने इसे बंद करना ही बेहतर समझा।

 
कंप्यूटर के कृत्रिम दिमाग से खतरे में पड़ा फेसबुक, साइंटिस्ट ने बताया रिस्क

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क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-

क्या है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-

कंप्यूटर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को ऐसे समझा जा सकता है, जब आप कंप्यूटर के साथ कोई गेम खेलते हैं, तो उससे जीतना काफी मुश्किल होता है। वह आपके हर मूव को समझकर आपको हरा देता है। ये कंप्यूटर में मौजूद आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस यानी कृत्रिम बुद्धि (एआई) की वजह से ही होता है। ये इंसानी दिमागी से काफी ज्यादा तेज होता है। अब ये इतना डेवलप हो चुका है कि इंसान की मदद के लिए बनाया गया ये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंसान के लिए ही परेशानी बनने लगा है।

फेसबुक पर डेवलप  की अलग भाषा-
 

फेसबुक पर डेवलप की अलग भाषा-

वैसे तो हर कंपनी अपने लिए आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस डेवलप करती है और ऐसा काफी पहले से होता आ रहा है। हालांकि हाल ही में फेसबुक पर विकसित कृत्रिम बुद्धि प्रणाली ने अपनी स्वयं की लैंग्वेज डेवलप कर सबको चौंका दिया है। फेसबुक की आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस इतनी स्मार्ट हो गई है कि उसने बिना एरर कम्यूनिकेशन के लिए खुद के कोड वर्ड्स की एक अलग प्रणाली ही विकसित कर डाली।

फेसबुक ने बंद किया ये प्रोग्राम-

फेसबुक ने बंद किया ये प्रोग्राम-

जब तक फेसबुक के शोधकर्ताओं को फेसबुक के इस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बता चला तब तक काफी देर हो चुकी थी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अंग्रेजी छोड़कर कोई और कोड लैंग्वेज बना ली थी। सिर्फ इतना ही नहीं, इसका उन्नत सिस्टम अन्य एआई एजेंटों के साथ बातचीत करने लगा था। यह हैरान करने वाली घटना थी। जब तक साइंटिस्ट को इस बारे में पता चला ये आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस काफी डेवलप हो चुका था और इसे कंट्रोल करना संभव नहीं था। ऐसे में इस पर शोध करने वाले विशेषज्ञों को सिस्टम ही बंद करना पड़ा।

साइंटिस्ट ने माना रिस्क-

साइंटिस्ट ने माना रिस्क-

साइंटिस्ट ने इसे बहुत बड़ा रिस्क माना और कहा कि आने वाले समय में इस तरह का आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इंसान को भी नियंत्रित कर सकता है। फिलहाल फेसबुक ने इस प्रोग्राम बंद कर दिया है, लेकिन दुनिया में ढेरों ऐसी कंपनियां हैं, जो आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस पर काम कर रही हैं।

क्यों जरूरी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-

क्यों जरूरी है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-

कंप्यूटर में कृत्रिम बुद्धी यह कंप्यूटर विज्ञान का एक हिस्सा है। एआई एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो तय की गई बुद्धिमत्ता का उपयोग कर कार्य कर सकता है। इसके जरिए एक मशीन मानव मस्तिष्क की तरह सोच-विचार कर बेहतर फैसले ले सकती है और काम कर सकती है। इसके जरिए मशीन अपने दम पर निर्णय लेने के लिए सक्षम होती है। इसी जरूरत के चलते इसे डेवलप और यूज किया जाता है।

 
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English summary
Facebook shuts AI program after create own code language. For more detail read in hindi.

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