फेक ऐप हो सकता है काफी खतरनाक, ऐसे करें पहचान

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    स्मार्टफोन्स के लिए इस समय प्लेस्टोर पर ढेरों ऐप्स मौजूद हैं, जिनमें से आप अपने लिए कोई भी ऐप को चुनकर क्लिक कर सकते हैं। यहां आपको हर छोटे-बढ़े काम के लिए ऐप्स के कई विकल्प मिल जाएंगे। आपको बता दें कि प्लेस्टोर पर इस समय कई फेक ऐप्स भी मौजूद हैं। यहां किसी एक ऐप खोजने पर एक नाम से कई ऐप सामने आ जाते हैं। इनमें ज्यादातर फेक ऐप होते हैं, जो बिल्कुल ओरिजनल ऐप के जैसे दिखते हैं और कई सारे ऐप्स के बीच सबसे मुश्किल होता है इन्हें पहचानना।

    फेक ऐप हो सकता है काफी खतरनाक, ऐसे करें पहचान

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    अगर आप सोच रहे हैं कि फेक ऐप डाउनलोड हो भी जाए, तो क्या प्रॉब्लम है। यहां बता दें कि फेक ऐप को डाउनलोड करने पर आपका डेटा बर्बाद हुआ, जो कि काफी छोटी बात है, लेकिन इस फेक ऐप के जरिए आपके स्मार्टफोन में वायरस अटैक हो सकता है और फोन में मौजूद आपके फोटो, जानकारी जैसा डेटा चोरी भी हो सकता है। आपके डेटा का गलत इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ऐसे में फेक ऐप की पहचान करना काफी जरूरी हो जाता है। यहां हम आपको कुछ टिप्स बता रहे हैं, जिनके जरिए आप आसानी से फेक ऐप की पहचान कर सकते हैं।

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    ऐप पब्लिशर-

    किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले ऐप के पब्लिशर के बारे में पढ़ लें। देखें कि ऐप का पब्लिशर कौन है। कई बार फेक ऐप के पब्लिशर का नाम भी ओरिजनल ऐप जैसा ही होता है। कई बार हैकर्स उन्हीं नाम को हल्का सा ट्विस्ट करके या उन्हें ही डाल दिया जाता है। हैकर्स ऐसा कर यूजर्स को कंफ्यूज करने की कोशिश करते हैं और कई बार लोग कंफ्यूज होकर फेक ऐप डाउनलोड कर लेते हैं। ऐसे में पब्लिशर का नाम केयरफुली चैक करें।

    रिव्यू चैक करें-

    दूसरे नंबर जो चीज फेक ऐप की पहचान बताती है, वह है उस ऐप के बारे में लिखा रिव्यू। किसी भी ऐप को डाउनलोड करने के पहले उसका रिव्यू भी चैक कर लें। कई बार इससे आपको ऐक के बारे में समझने में और उस ऐप के फीचर कितने प्रेक्टिकली यूजफुल हैं ये समझने में मदद मिल जाती है। ऐसे में ऐप चाहे फेक हो या रियल कस्टमर्स के रिव्यू जरूर पढ़े। रिव्यू में अगर ऐप के बारे में नेगेटिव बाते लिखी हैं तो समझ जाइए यह ओरिजनल ऐप नहीं है।

    ऐप पब्लिशिंग डेट-

    फेक और रियल ऐप में पहचान करने की तीसरी और सबसे आसान ट्रिक है कि ज्यादातर फेक ऐप की पब्लिश डेट थोड़े ही दिन पहले की होती है। अगर डेट बहुत पहले की है और ऐप को बाद में लॉन्च किया गया है, तो भी वह फेक ऐप हो सकता है। ऐप को डाउनलोड करने के पहले उसके लॉन्च की डेट जान लें। अगर इंटरनेट पर उस ऐप से जुड़ी कोई जानकारी मौजूद नहीं है तो हो सकता है कि वो एक फेक ऐप हो। ऐसे ऐप को गलती से भी इंस्टॉल न करें।

    नेम स्पेलिंग-

    फेक ऐप में स्पेलिंग संबंधी गल्तियां जरूर होती हैं। दरअसल इन ऐप्स को ओरिजलन को कॉपी करके बनाया जाता है। ऐसे में आसानी से स्पेलिंग ऐरर हो जाते हैं। इनके जरिए फेक ऐप को आसानी से पहचाना जा सकता है।


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    English summary
    Here are a few tips to help you identify the real applications from the fake ones. for more detail read in hindi.
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