सुंदर पिचाई बने Google के नये CEO

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भारतीयों की काबिलियत का लोहा सारा विश्व मानता है। इस बात की पुष्टि हाल के एक ओर उदाहरण हो जाती है। दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने सोमवार को एक नए काॅपरेटिंग स्ट्रक्चर की घोषणा करते हुए नई कंपनी ‘‘अल्फाबेट इंक'' की घोषणा की है। अब गूगल की सभी गतिविधियां इसी कंपनी के अंतर्गत संचालित की जाएगी। हालाकि गूगल की समस्त सेवाएं पहले की ही तरह जारी रहेंगी तथा साधारण व्यक्ति के जीवन पर गूगल के इस परिवर्तन का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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पर गूगल के संस्थापक लैरी पेज का मत है कि गूगल अब कई तरह की सेवाएं दे रहा है और ऐसे में कंपनी के पुनर्गठन से उसका ढांचा ज्यादा आसान होगा। इस बड़े बदलाव के तहत भारतीय मूल के सुंदर पिचाई को गूगल का सीईओ नियुक्त किया गया है। अब गूगल के सभी उत्पाद और योजनाएं अल्फाबेट इंक नामक नई छत के अंतर्गत होगी।

सुंदर पिचाई बने Google के नये CEO

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गूगल के संस्थापक लैरी पेज इसके चीफ एग्जीक्यूटिव होंगे। लैरी पेज (को-फाउंडर, गूगल) की ब्लॉग पोस्ट के अनुसार, गूगल अब ‘स्लिमड डाउन' कंपनी बन गई है और अल्फाबेट इंक का हिस्सा होगी। उन्होंने कहा, ‘सुंदर गूगल को और ज्यादा क्लीन और जिम्मेदारपूर्ण बनाएंगे।' हालांकि अल्फाबेट की जिम्मेदारी पेज सीईओ और गूगल के को-फाउंडर सेर्गे ब्रिन प्रेसिडेंट के रूप में संभालेंगे। गूगल के गूगल ड्राइव, जीमेल ऐप, गूगल वीडियो कोडेक, क्रोम ओएस, एंड्रॉइड ऐप आदि अनेक उत्पादों को तैयार करने में सुंदर की प्रमुख भूमिका रही है।

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सुंदर पिचाई बने Google के नये CEO

2013 में पिचाई को एंड्रायड ओएस का उत्तरदायित्व सौंपा गया था जिसे उन्होंने बहुत ही खूबसूरती से निभाया। आपको बताते चले कि सुंदर का जन्म चेन्नई में हुआ था। उनके पिता एक इलेक्ट्रिक इंजीनियर थे। वह 2004 से यानि लगभग ग्यारह वर्षों से गूगल से जुड़े हुए हैं। उन्हें अच्छे मैनेजरों की श्रेणी में रखा जाता है। आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग में डिग्री लेने वाले सुंदर कभी गूगल के प्रोडक्ट चीफ रहे। वर्तमान में, वह गूगल में सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (एंड्रॉइड, क्रोम और ऐप्स डिविजन) पद पर आसीन थे।

गूगल की रिस्ट्रक्चरिंग के अंतर्गत उन्हें गूगल का सीईओ नियुक्त किया गया। गूगल द्वारा सैमसंग को पार्टनर बनाने में भी पिचाई की अहम भूमिका रही। 1972 में चेन्नई में जन्मे सुंदर पिचाई अभी 43 वर्ष के हैं। उनका वास्तविक नाम पिचाई सुंदराजन है, पर सभी उनको सुंदर पिचाई के नाम से पहचानते हैं। बचपन में सुंदर पिचाई का परिवार दो कमरों के घर में रहता था। उनके पास टीवी, टेलीफोन और कार जैसी कोई भी सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

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पघई में तेज होने का लाभ सुंदर को मिला जब वह उन्हें आईआईटी खघ्गपुर में विशेष सीट प्राप्त हो गई। यहां से उन्होंने इंजीनियरिंग की। इसके बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप मिल गई। ऐसे समय उनकी पारिवारिक स्थिति अच्छी नहीं थी। यहां तक की हवाई जहाज के किराये के पैसे हेतु भी उनके पिता को उधार उठना पड़ा। आरंभ में सुंदर गूगल में प्रोडक्ट और इनोवेशन अधिकारी के रूप में रखे गए थे। पेन्सिलवानिया यूनिवर्सिटी में पिचाई साइबेल स्कॉलर के नाम से पहचाने जाते हैं। पिचाई ने अपनी बैचलर डिग्री आईआईटी, खडगपुर से प्राप्त की है। उन्होंने अपने बैच में सिल्वर मेडल प्राप्त किया था।

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सुंदर जब 1995 में स्टैनफोर्ड में थे तब भी उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। वहां वह पेइंग गेस्ट बनकर रहेे। मनी सेविंग करते हुए वह पुरानी वस्तुओं का उपयोग करते थे। मगर उन्होंने कभी भी पघई से समझौता नहीं किया। अमेरिका में सुंदर ने एमबीए की पढ़ाई स्टैनडफोर्ड यूनिवर्सिटी से की और वॉर्टन यूनिवर्सिटी से एमएक की पढ़ाई की। किस्मत ने पलटा खाया और 2004 मंे सुंदर की गूगल में इंट्री हुई।

उनके एक सुझाव से वह गूगल के संस्थापक लैरी पेज की नजरों में आ गए। उसके बाद सुंदर ने फिर पीछे पलटकर नहीं देखा और दिनबदिन अपनी मेहनत से कामयाबी की सीढि़यां चढ़ते गए। आपको जानकर हैरानी होगी कि कभी उन्हें नौकरी न छोड़ने के लिए 305 करोड़ रुपए मिले थे। mensxp.com की माने तो ट्विटर ने 2011 में पिचाई को नौकरी ऑफर की थी, लेकिन गूगल ने उन्हें 50 मिलियन डॉलर (लगभग 305 करोड़ रुपए) देकर रोक लिया था।

English summary
Pichai, 43, was named chief executive officer of the Internet titan Monday, as Google unveiled a new corporate structure creating an umbrella company dubbed Alphabet.
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